चंद इंसाफ

 चंद इंसाफ


न जाने जोरों से क्यों ?

राजनीति में मच गई है कुछ हलचल,

हो गए हैं राजनैतिक नेता भी, 

अपनी राजनैतिकता में विफल,

पर क्या ?

सहीं में हमारी गुहारें सुनने को,

उनके ज़ी कतराते हैं,

या फिर,

उन आशा भरी पुकारों को सुनकर भी अनसुनी कर जाते हैं।

सच कहिए तो हुजूर,

हमें उनके वो निभाये वादे,

नज़र नहीं आते हैं।

क्योंकि वे उन वादे से मुकर जाते हैं।

पर खैर जो भी हो,

आज मेरी राय में, हम आदमी के लिए,

बेशक बेइंसाफी है।

ज़रा देख भी लें कि कतार कितनी लंबी है, 

इस बेवफाई की,

क्योंकि,

मेरी चंद इंसाफ भी अभी बाकी है।।

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