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अनाथ

  अनाथ उदास है मेंरा ये मन, उदास है ये उपवन, भीड़ भरी दुनिया फिर भी, उदास है मेरा जीवन। जीवन में कुछ करने को, करता है मेरा ये मन, जीवन मुश्किल है फिर भी, जीना है मेरा जीवन। जीवन के ये रंग अनोखे, सबको दिया है मौसम, तुमने मुझसे सब कुछ छीना, पर दिया न मुंझको सावन। कभी कभी लगती है मुझको, ये दुनिया नरक की चौखट, मौत से भी बदतर होता है, जो पाता है एैसा जीवन।।

भ्रष्टाचार

  भ्रष्टाचार धर्म निरपेक्षता कहलाने वाला देश, आज धर्म पक्षता की ओर बढ़ गया है। जहां पाप धुलना तो बाकी रहा, वहां पूण्य ही धुल गया है। आज देश में हो रहे है, दंगे फसार सरेआम, मगर सरकार की हर कोशिशें,  हो गई है नाकाम। कल जिसका डर था, वो आज हो करके रह गया। जीवन की हर आशा, पानी सा बह गया। देश में बढ़ चले हैं, दंगे फसाद इतने कि, भाई, भाई को मारने पे, तुल गया है। धर्म निरपेक्षता के बाजार में, धर्म पक्षता का दुकान खुल गया है।।

प्यास

प्यास कब तक मुस्कुराती वो नन्हीं मुस्कान, क्योंकि वक्त को बदलना ही मंजूर था। और, वक्त के थपेड़ों ने नन्ही मुस्कान छीन ली। अब वह तन्हाईयों के घेरे में जीवहीन काया बनीं, एैसा तांडव देख रही है जिसमें, वाद विवाद बन गए हैं। इस धरोहर के भाग बन गए हैं। यहां की मिट्टी प्यास से व्याकुल, पानी का इंतजार कर रही है। मगर,  उस बूंद भर पानी से सिर्फ आग का बुझना मंजूर था, प्यास का बुझना नहीं।  

मुसाफिर

  मुसाफिर अनजान मुसाफिर तुम भी हो, अनजान मुसाफिर हम भी हैं। अनजान डगर ये क्या जाने, इस रस्ते पे कहीं एक मंजिल भी है। सरिता की धारा को हमने, क्या यूं ही बहते देखा है ? जल की धारा क्या जाने हैं, इस रस्ते पर कहीं एक मंजिल भी है। अनजान निशाना को आखिर, कब तक तुम यूं ही साधोगे ? तीर भी बेचारा क्या जाने,  आखिर कहां तुम्हारी एक मंजिल भी है ? अनजान मुसाफिर तुम भी हो, अनजान मुसाफिर हम भी हैं। अनजान डगर ये क्या जाने, इस रस्ते पे कहीं एक मंजिल भी है।

चंद इंसाफ

 चंद इंसाफ न जाने जोरों से क्यों ? राजनीति में मच गई है कुछ हलचल, हो गए हैं राजनैतिक नेता भी,  अपनी राजनैतिकता में विफल, पर क्या ? सहीं में हमारी गुहारें सुनने को, उनके ज़ी कतराते हैं, या फिर, उन आशा भरी पुकारों को सुनकर भी अनसुनी कर जाते हैं। सच कहिए तो हुजूर, हमें उनके वो निभाये वादे, नज़र नहीं आते हैं। क्योंकि वे उन वादे से मुकर जाते हैं। पर खैर जो भी हो, आज मेरी राय में, हम आदमी के लिए, बेशक बेइंसाफी है। ज़रा देख भी लें कि कतार कितनी लंबी है,  इस बेवफाई की, क्योंकि, मेरी चंद इंसाफ भी अभी बाकी है।।