भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार
धर्म निरपेक्षता कहलाने वाला देश,
आज धर्म पक्षता की ओर बढ़ गया है।
जहां पाप धुलना तो बाकी रहा,
वहां पूण्य ही धुल गया है।
आज देश में हो रहे है,
दंगे फसार सरेआम,
मगर सरकार की हर कोशिशें,
हो गई है नाकाम।
कल जिसका डर था,
वो आज हो करके रह गया।
जीवन की हर आशा,
पानी सा बह गया।
देश में बढ़ चले हैं,
दंगे फसाद इतने कि,
भाई, भाई को मारने पे,
तुल गया है।
धर्म निरपेक्षता के बाजार में,
धर्म पक्षता का दुकान खुल गया है।।
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